Saturday, February 4, 2012

संवाद की ओर


संवादहीनता से जन्मे हैं यह नये शब्द
जिस ओर उजाला है
बस उस पथ जाएगें अब ये पद
है भोझल जो माहौल यहाँ का
अब उसको हल्का होना होगा
बेजान हुए इस आलम मे
अब प्राण वायु को घुलना होगा
ख़त्म हो रहे इस अध्याय मे
कुछ नये पत्रों को जुड़ना होगा
रहस्यमय हो रहे मेरे इस व्यक्तित्व के
अब कुछ राज़ो को खुलना होगा
पथरीली इन आखों मे
अब कुछ सपनो को सजना होगा
सूने इस दिल मे
किसी को दस्तक देना होगा
इतने लंबे इंतज़ार को
अब तो आख़िर मिटना होगा
सूखी हर डाली पर
अब नयी कलियों को खिलना होगा
संवादहीनता से जन्मे हैं यह नये शब्द
जिस ओर उजाला है
बस उस पथ जाएगें अब ये पद

 

1 comment:

  1. Tilling for love? Why would you call this "tilling" and not "searching" - I wondered. More than merely a synonym, is it reflective an Engineer's desire to come up with a formula for everything? One can come up with a formula for tilling soil...surely someone can try for 'love ka formula'. :-)

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