भूल भी कभी कभी गुनाह की तस्वीर लेती है
नेक इरादों मे कभी कभी तो खलल पैदा होती है
नष्ट होती हुई संसार की श्रुतियाँ,
मेरे ह्रद्य को व्यंग की राह ले जा खड़ी करती हैं
विद्वनो के विचारों मे आग लगाते हुए,
आज हम अपने ही गुलदस्तान सज़ा लेते हैं
महानुभाओं के अध्याए पर धूल की परत,
बिछाते ही जाते हैं
नष्ट होतीं जा रहीं संसार की श्रुटियों को,
और भी हवा देते जा रहें हैं
बर बस ज़िंदगी मे दौड़ते, भागते हुए
तलाश के पदचिन्हों पर लाशों की कतार बिछाते जा रहें हैं
इसलिए तो स्पष्ट है, भूल भी कभी कभी गुनाह की तस्वीर लेती है,
बेरंग से चित्रों मे स्याही की जगह लहू की मीनार भरती जाती है!!
नेक इरादों मे कभी कभी तो खलल पैदा होती है
नष्ट होती हुई संसार की श्रुतियाँ,
मेरे ह्रद्य को व्यंग की राह ले जा खड़ी करती हैं
विद्वनो के विचारों मे आग लगाते हुए,
आज हम अपने ही गुलदस्तान सज़ा लेते हैं
महानुभाओं के अध्याए पर धूल की परत,
बिछाते ही जाते हैं
नष्ट होतीं जा रहीं संसार की श्रुटियों को,
और भी हवा देते जा रहें हैं
बर बस ज़िंदगी मे दौड़ते, भागते हुए
तलाश के पदचिन्हों पर लाशों की कतार बिछाते जा रहें हैं
इसलिए तो स्पष्ट है, भूल भी कभी कभी गुनाह की तस्वीर लेती है,
बेरंग से चित्रों मे स्याही की जगह लहू की मीनार भरती जाती है!!
No comments:
Post a Comment